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सरकारी सेवा में रहते रहते भारत के संविधान के अनेक हिस्सो को पढ़ने का अवसर मिलता रहा । ये भी हमेशा विश्वास रहा कि व्यक्ति को देश के संविधान के प्रति गहरी निष्ठा रखनी चाहिए । सीधे साधे देशवासियों को संविधान से ज्यादा मतलंब नही होता है। वे ये भी मानते है कि संवैधानिक व्यवस्था से उन्हें क्या लेना देना है। जन्म लिए हर व्यक्ति को मरना ही है तो वे मरने के लिए खाते है, पीते है, जागते है सोते है और मर भी जाते है। लेकिन बहुत से व्यक्ति मेरे जैसे है जिनका द्रष्टिकोण जुदा है। वे सजग है, सतर्क है लेकिन अपने विरुद्ध बनते षड्यंत्र से अनभिज्ञ है। जब कुचक्र में फंसते है तो सिवाय संवैधानिक उपचार के अलावा कोई विकल्प शेष नही बचता है। हर व्यक्ति की समझ का एक स्तर होता है।कुछ लोग कुत्सित मानसिकता से भरे होते है जिनके मस्तिष्क में नकारात्मकता की जड़े इतनी गहरी होती है कि वे खाद पानी न भी डाले तो अमरबेल आपादमस्तक अपना घर बना लेती है। ऐसे लोग आपके प्रति एक सोंच निर्मित करते है और उसी सोंच को अभिव्यक्त करते है। इनके कारण अनेक व्यक्ति ऐसे कुचक्र में फंसते है और आगे भी फसेंगे क्योकि बिच्छु को कितनी बार पानी से निकालने की कोशिश करो वो कटेगा ही। ऐसे लोगो से निपटने के लिए आपको संवैधानिक अधिकार की ही मदद लेनी पड़ती है और आगे जरूरत भी पड़ेगी। आज़ादी के मेरे मायने

16 Aug 2023 03:02AM,
by: Babuaa Desk
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छत्तीसगढ़ प्रभु श्री राम का ननिहाल भी है। उन्होंने अपने वनवास काल में सर्वाधिक समय छत्तीसगढ़ में बिताया, इसलिए पूरा छत्तीसगढ़ राममय है। भांजा राम की याद में यहां हर परिवार में अपने भांजे में प्रभु श्री राम जैसी छवि देखते है। प्रभु श्री राम के स्मृतियों को ताजा करने के लिए राज्य शासन द्वारा राम वन गमन पथ का निर्माण किया जा रहा है। प्रभु श्री राम के वनवास काल की सुन्दर प्रस्तुति अरण्य काण्ड में है, जिसमें उनके वनवास काल का विवरण है। हाल ही में रायगढ़ में आयोजित रामायण महोत्सव में देश-विदेश की कलाकारों ने सुन्दर प्रस्तुति देकर अरण्य काण्ड को जीवन्त कर दिया।  रामायण मानस गायन से राममय हुआ छत्तीसगढ़

08 Aug 2023 02:56AM,
by: Tikendra Sinha