सावन औऱ बारिश का नाता चोली दामन के समान है। बाकी किसी भी भारतीय महीने में पानी गिरे लेकिन सावन के पानी का अपना अलग ही मजा है। भारतीय फिल्म निर्माताओ के लिए सावन एक पसंदीदा मौसम है। फिल्मों के नामकरण से लेकर गानों में सावन का जिक्र होना जरूरी है। फिल्मी सावन, फिल्मी बारिश
08 Jul 2023 11:09AM,by: Babuaa Desk
भारत के संविधान में केंद्र- राज्य की परिकल्पना निर्धारित है। राष्ट्रपति और राज्यपाल के कार्य के सहयोग के लिए क्रमशः प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पद का उल्लेख है। उप- प्रधानमंत्री अथवा उप मुख्यमंत्री पद का उल्लेख नहीं है। राजनीति में संवैधानिक व्यवस्था से परे भी अपनी अलग व्यवस्था बनाने का शगल है। इसे संतुलन का सिद्धांत कहा जाता है। दल के भीतर चाहे क्षेत्रीय संतुलन की बात हो या जातीय संतुलन या बाहुबल का संतुलन या फिर व्यक्तित्व का संतुलन हो, बराबर करना पड़ता है। इसे भीतर ही भीतर पनप सकने वाले असंतोष को ढाँकने की सफल कोशिश भी कहा जा सकता है। अब उप- मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव
29 Jun 2023 02:15AM,by: Babuaa Desk
हाल ही "आदिपुरुष" फिल्म के संवाद को लेकर देश भर में भारी बखेड़ा खड़ा हुआ। स्तरहीन संवाद को लेकर मामला अदालत तक पहुँचा। फिल्म में संवाद लिखनेवाले मनोज मुंतशिर शुक्ला की राष्ट्रव्यापी आलोचना हुई। क्षमा याचना सहित सवांद सुधारे गए। सेंसर बोर्ड की भी आलोचना हुई कि आखिर अध्यक्ष सहित अनेक सदस्यो ने क्या देखा - सुना। प्रयागराज हाई कोर्ट ने मनोज मुंतशिर शुक्ला को नोटिस थमा दिया है। कुछ बुद्धजीवी मुगालते में क्यो रहते है!
29 Jun 2023 02:14AM,by: Babuaa Desk
आज से चालीस साल पहले 1983 के विश्व कप क्रिकेट के फाइनल से पहले भी एक फाइनल मैच हुआ था। ये मैच वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड पाकिस्तान या न्यूज़ीलैंड के खिलाफ नहीं हुआ था बल्कि ज़िम्बाब्वे टीम के खिलाफ हुआ था। ज़िम्बाब्वे, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज को हरा चुकी थी और यही मैच था जो भारत को आगे या पीछे कर सकता था। सीधा प्रसारण करने वालो के हड़ताल के चलते ये मैच टेलीविजन में नहीं देखा जा सकता था हॉ रेडियो पर सुना जरूर गया। लाजवाब कपिलदेव
19 Jun 2023 07:18AM,by: Babuaa Desk
अक्सर हम परसंस्कृति के विचारधाराओं के प्रति अपने नजरिये जुदा जुदा रखते है। 1991 के बाद देश ने दीगर देशों के लिए व्यवसाय के द्वार खोले, गूगल युग की शुरुवात हुई तो बहुत सी अच्छी बातों से भी हम वाकिफ हुए उनमें से एक रिश्ते जो समाज मे अनिवार्य है अगर उनके लिए कोई दिन विशेष रख कर रिश्तों को विशेष बनाने की परम्परा भी है। इसमे कोई बुराई नही है। आम लोगो मे ईश्वर के प्रति भी दिन विशेष है।जैसे हिंदुओ में दुर्गा अष्टमी,राम नवमी,हनुमान जयंती, जन्माष्टमी ,आदि आदि, वैसे ही मुश्लिमो में शुक्रवार, रमजान, ईद, क्रिस्टियन में गुड फ्राई ड़े, क्रिसमस, सिक्खों में गुरुनानक जयंती का दिन विशेष है ही। इनसे परे परिवार में जो बुनियादी रिश्ते है उनके लिए किसी दिन को विशेष बना देना, मेरे विचार से अच्छी बात है। दिन विशेष से बाकी दिन अविशेष नहीं हो जाते है जैसा की नकारात्मक सोच वाले टिप्पणी करते है। किसी भी धर्म के किसी भी ईश्वर के दिन विशेष के बाद भी हमारी आस्था कमजोर नही होती लेकिन दिन विशेष में अन्य दिनों की तुलना भव्य हो जाती है। पिता जी की जय हो
18 Jun 2023 06:10AM,by: Babuaa Desk
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