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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कुछ महिला क्रिकेटर्स से दीगर देश की महिला खिलाड़ी थर्राती है इनमें से एक नाम भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर है। मैदान में उनके आने का एक मतलब होता है।दमदार बल्लेबाज़ी, पहले धीमी गति से औऱ फिर निगाहे जम जाए तो फिर चार औऱ छः रनों की बरसात मैदान में देखने को मिलती है। स्वभाव से वे जोखिम उठाने वाली है और आक्रामकता उनकी कप्तानी में झलकता है ।एक ये वजह भी है कि आसानी से हारना नही चाहती, मुश्किल से जीत के लिए जूझती है। हाल ही में बांग्लादेश में एकदिवसीय मैच की सीरीज के आखिर मैच में जो घटिया या कहे स्तरहीन अंपायरिंग हुई उसकी हरमनप्रीत भी शिकार हो गयी। बैट से स्टंप उखाड़ दिया।अम्पायर को भी सुना दिया।भारत के तीन खिलाड़ी गलत अम्पायरिंग के शिकार हुए।मैच टाई हो गया। हरमनप्रीत का गुस्सा शांत नही हुआ। संयुक्त विजेता घोषित होना भी नागवार गुजरा। बस, कह दिया कि अगली बार बांग्लादेश देश आएंगे तो अंपायरिंग के लिए भी सोंच कर आएंगे। इससे भी दिल नही भर तो ट्रॉफी लेते वक्त अम्पायर को भी आने के लिए कह दिया। सच, कडुवा होता है लेकिन सच कहना कडुवा होगा ये हरमनप्रीत समझ न सकी। उनका व्यवहार अप्रिय माना गया और इंटरनेशनल क्रिकेट कमेटी ने हरमनप्रीत पर अगले दो मैच खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया। मैच फीस भी 50 फीसदी काट दी गयी। हरमन "अ" प्रीत कौर

26 Jul 2023 06:57AM,
by: Babuaa Desk
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डोमिनिका ( वेस्टइंडीज) में खेले गए पहले टेस्ट की पहली पारी में वेस्टइंडीज की टीम 150 रन बनाकर आउट हो गयी। जिस देश की टीम में क्लाइव वॉलकाट, इवर्टन विक्स, रोहन कन्हाई, कोरनार्ड हंट, गैरी सोबर्स, रॉय फेरडिक्स, क्लाइव लॉयड, कालीचरण, गार्डन ग्रीनिज, डेसमंड हेंस, विवियन रिचर्ड्स,लांस गिब्स, जोएल गार्नर, एंडी राबर्डस, माइकल होल्डिंग, कोर्टनी वाल्स , ब्रायन लारा जैसे खिलाड़ी रहे हो। ये देश 1980 के दशक में ऐसी टीम थी कि दुनियां का कोई भी देश इस टीम के खिलाफ खेलने के पहले बहुत हिम्मत जुटाता था। 1990 के दशक में इस देश में खिलाड़ियों का ऐसा अकाल छाया कि कभी दो एक दिवसीय विश्व कप जीतने वाला देश इस साल के विश्वकप आयोजन में सहभागी नही रहेगा।  कमजोर वेस्टइंडीज

13 Jul 2023 05:52AM,
by: Babuaa Desk
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1932 से लेकर 1970 तक भारतीय क्रिकेट टीम को औसत दर्जे की टीम माना जाता था।विदेशों में जीत तुक्का हुआ करती थी। न्यूज़ीलैंड से एकात सीरीज भले ही जीत लिए थे लेकिन इंग्लैंड जिसे क्रिकेट की काशी कहा जाता है वहां जीत नहीं मिली थी। ब्लेक स्ट्रॉम कहे जाने वेस्ट इंडीज , ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीतना मानो स्वप्न था। इसके चलते भारतीय क्रिकेट टीम को भाव नही मिलता था। 1971 में मुम्बई से एक ओपनर बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर का चयन हुआ। ये बल्लेबाज़ घरेलू क्रिकेट में बेहतर प्रदर्शन कर रहा था। वेस्टइंडीज दौरे में प्रदर्शन मैच में इस बल्लेबाज़ ने 125 रन की पारी खेला। पहले टेस्ट मैच में इस बल्लेबाज को जगह नही मिली लेकिन दूसरे टेस्ट के दोनो परियों में ये बल्लेबाज़ शतक की ओर बढ़ रहा था तब कप्तान अजीत वाडेकर ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे कि ये शतक न बना सके। क्यो? सुनील मनोहर गावस्कर

10 Jul 2023 05:38AM,
by: Babuaa Desk