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भारतीय संस्कृति में वैदिक युग से लेकर रामायण और महाभारत महाग्रन्थ काल मे गुरु, परिवार औऱ समाज के उम्र में बड़े व्यक्तियों के पैर छू कर सम्मान देने की परंपरा का निर्वाह आज भी हो रहा है। एयरपोर्ट जिसे आर्थिक रूप से समृद्ध लोगो का जमावड़ा माना जाता है आप सार्वजनिक रूप से इस परम्परा को निर्वाहित होते देख सुकून पा सकते है। कबीर दास ने इन पंक्तियों में कि -" गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काकू लागू पाय, बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो बताय" में किसके पैर पहले छुए जाने है की महत्ता बताई है। रामायण में 14 साल के वनवास की मांग करने वाली कैकेयी के पैर छूकर उनके बड़े होने का सम्मान दिया था। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने दुर्योधन को बड़ो के पैर छूने पर आशीर्वाद मिलने का गुण बताया था। हाल ही में दो घटनाएं ऐसी घटी जिसे सोशल मीडिया में सम्मान संस्कृति से जोड़ कर बड़प्पन के रूप में दिखाया गया। पहला था पापुआवन्यू गिनी के राष्ट्र प्रमुख जेम्स मरापे का भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सार्वजनिक रूप से पैर छूकर सम्मान देना और दूसरा आईपीएल फाइनल में चेन्नई सुपरकिंग्स के विजेता होने के बाद रविन्द्र जडेजा की पत्नी रिवाबा जडेजा( भारतीय जनता पार्टी की विधायक) जडेजा द्वारा सार्वजनिक रूप से रविंद्र जडेजा का पैर छूना। आम जनमानस में दोनो घटनाओं ने बड़ो के सम्मान को लेकर इन पर टिप्पणी की। पैर छूना सम्मान का चर्मोत्कर्ष

11 Jun 2023 06:39AM,
by: Babuaa Desk
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छत्तीसगढ़ की धरा पर आगामी तीन दिन भांचा राम के स्तुति का दिन रहेगा। देश विदेश के कलाकारों के द्वारा मानस गान से लेकर नाट्य प्रस्तुति होगी। 6 व्यक्तित्व भांचा राम के प्रति अपने विचार साझा करेंगे। अपने आप मे राम के अरण्य काल को जनमानस में लाने की ये परंपरा विशिष्ट है। हिन्दू धर्म मे तुलसीदास सनातन व्यक्तित्व रहे जिन्होंने आदिकवि वाल्मीकि द्वारा 24 हज़ार संस्कृत के श्लोक वाले रामायण को अवधि भाषा मे12800 पंक्ति, 27 श्लोक, 1073 दोहे 4608चौपाई, 207 सोरठा औऱ 86 छंदों में संकलित कर जनमानस के लिए इतना सहज बना दिया कि बिना पढ़े स्तुत प्रक्रिया से साधारण मनुष्य भी राम की कथा वैसा कह सकता है जैसा तुलसीदास कह गये। रामायण, रामायण

01 Jun 2023 06:47AM,
by: Babuaa Desk
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लोकतंत्र में ही जब पक्ष और विपक्ष की लोकतांत्रिक व्यवस्था है तो हर बात में समर्थन और विरोध होना स्वाभाविक है। पक्ष इस बात से बेफिक्र रहता है कि विपक्ष की बात  सुनने का मतलब वक़्त जाया करना है।विपक्ष को लगता है कि पक्ष का समर्थन कर दिए तो सार्थकता खत्म हो जाएगी। इन्ही मुद्दों के बीच 28 मई 2023( संयोग है या सुनियोजित योजना है कि इसी दिन वीर सावरकर  के जन्म का भी दिन है) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  नए संसद भवन का उद्घाटन करने जा रहे है। देश के 19 दलों जिसमे अधिकतम संख्या 52 है।आठ दलों के पास दहाई संख्या के सदस्य है।15 दल के केवल 1 सदस्य है। इनके द्वारा  उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया जा रहा है। कारण है प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन।  कुछ लोगो की राय है कि उद्घाटन राष्ट्रपति के द्वारा किया जाना चाहिए था। एक जनहित याचिका भी लगाई गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ लगाते हुए ये बता दिया कि याचिका का मकसद उस  फूफा के समान है जो शादी में  विघ्न चाहता है। नया संसद भवन औऱ नया नजरिया

27 May 2023 01:21PM,
by: Babuaa Desk