विचार

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आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जम्मू-कश्मीर में पार्टिया नए-नए मुद्दों की तलाश कर रही हैं। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं के पांच हजार साल पुराने शक्ति केंद्र शारदा पीठ को भाजपा बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है। भाजपा श्री शारदा पीठ को भारत की ज्ञान परंपरा का स्त्रोत व प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता का प्रतीक बता रही हैं।

भारतीय जनता युवा मोर्चा के पटनीटॉप में विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए हुए दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में शारदा पीठ स्मृति चिह्न प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना व अन्य नेताओं को प्रदान किए गए। इससे पहले भारतीय जनता युवा मोर्चा ही शारदा पीठ को पाकिस्तान से मुक्त करवाने की मांग को लेकर मोटर साइकिल रैली भी निकाल चुकी है। ।।।। उल्लेखनीय है कि श्री शारदा पीठ से कश्मीरी पंडितों के अलावा देश भर के हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं। कश्मीरी पंडितों की श्री शारदा पीठ के प्रति असीम आस्था भी है। राजा अशोक ने 237 ईसा पूर्व श्री शारदा पीठ मंदिर का निर्माण करवाया था। कश्मीरी पंडित लंबे समय से शारदा पीठ कॉरिडोर का निर्माण करवाने की मांग कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में पाकिस्तान से लगती लाइन आफ कंट्रोल से शारदा पीठ की दूरी केवल दस किलोमीटर है। भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष रिंकू चौधरी का कहना है कि देश की संसद ने 1994 में संसद में प्रस्ताव पारित कर जम्मू कश्मीर के सारे हिस्से जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू कश्मीर का हिस्सा भी शामिल है को जम्मू कश्मीर का अभिन्न अंग माना हुआ है। ऐसे में श्री शारदा पीठ पर पूजा अर्चना के अलावा कॉरिडोर बनाने की बात हो या फिर पाकिस्तान के अवैध कब्जे से इसे मुक्त करवाना, यह हमारा संकल्प है।

23 Jun 2022 01:00AM,
by: Imran Khan
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संघ लोक सेवा आयोग ने 2021 के परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में युवतियों की सफलता के साथ साथ अब प्रतियोगी परीक्षाओं में भी वे युवकों को पीछे करने में आगे होते जा रही है। इसे समाज का शुभ संकेत माना जाना चाहिए कि परंपरागत रूप से विवाह और भोजन व्यवस्था के लिए रचित इस पक्ष ने अपने लिए नए संसार के सृजन का बीड़ा खुद उठाया है और न केवल आधी बल्कि पूरी आबादी के लिए स्वयं को उद्धत करते हुए प्रेरणा बने है। संघ लोक सेवा आयोग की हर परीक्षा अत्यंत ही सूक्ष्म जानकारी के लिए जानी जाती है। स्थूल अध्ययन करने वाले इस परीक्षा के प्रारंभिक और उसके बाद मुख्य परीक्षा में ही सफल नही हो पाते है ऐसे में जब साक्षात्कार की बारी आती है तो ये रोड़ा भी पार करना कठिनतम हो जाता है।इसके बावजूद पहले तीन स्थानों में युवतियों का कब्जा होना ये संकेत भी देता है कि अगर परिवार घर मे आदर्श वातावरण बनाने में पहल करे तो विभिन्न सफलता के क्षेत्र में श्रुति, अंकिता, गामिनी और श्रद्धा( छत्तीसगढ़) झंडा गाड़ सकने के सामर्थ्य रखती है। आधी आबादी ने पहले सफल 25 अभ्यर्थियों में पहले तीन स्थान के साथ कुल 10 स्थानों पर खुद को रखा है ये चुनौती युवकों के लिए आगे खतरनाक संकेत है कि उनको कंधे से कंधा मिलाकर बराबरी की मांग करने वाली वामा अपनी गति बढ़ाते जा रही है। शाबाश श्रुति, अंकिता, गामिनी और श्रद्धा

01 Jun 2022 11:44AM,
by: Babuaa Desk
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को लेकर शिमला शहर छावनी में तबदील हो गया है। रिज, मालरोड, लक्कड़ बाजार, टका बेंच, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों से लेकर उपनगरों में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है। शिमला पुलिस के एक उच्च अधिकारी के मुताबिक छह बटालियन से पांच हजार जवान सुरक्षा का जिम्मा संभालेंगे। शहर के प्रवेश द्वार शोघी बैरियर, टुटू चौक, मशोबरा, मैहली-जुन्गा बाईपास, सैंज खड्ड, सुन्नी, कुपवी, जुब्बल और चिड़गांव के बैरियर और नाकों पर पुलिस अलर्ट है। अंतरराज्यीय बैरियर कुड्डू और जमराड़ी पर पुलिस टीमें बा nnu 8 क्षेत्र से आने वाले लोगों की सूचियां बना रही हैं।।।। पहचान पत्र, वाहन और मोबाइल नंबर दर्ज करने के बाद प्रवेश दिया जा रहा है। डीएसपी हेडक्वार्टर कमल किशोर वर्मा ने बताया कि अतिरिक्त जवानों की ड्यूटी बैरियर और नाकों पर लगाई गई है। पुलिस टीमों ने शहर में गश्त बढ़ा दी है। कच्चीघाटी, तारा देवी, लक्कड़ बाजार और एशिया द डाउन क्षेत्र में करीब छह दर्जन से ज्यादा होटलों और होमस्टे की चेकिंग कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। पर्यटन स्थल कुफरी, मशोबरा और नालदेहरा क्षेत्र में होटलों का निरीक्षण किया। 

28 May 2022 01:01AM,
by: Imran Khan
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बड़ा ही सार्थक प्रश्न उठा है कि किसी निर्माण से होनेवाले लाभ का फायदा संबंधित को मिलना चाहिए अथवा नही और अगर मिलना चाहिए तो क्या पूर्व में ऐसा किया गया था । यह प्रश्न कश्मीर फ़ाइल से होनेवाले लाभ को कश्मीर के विस्थापितों के संदर्भ में है। ये भी प्रश्न उठा है कि गंगूबाई के लाभ का फायदा क्या उन लोगो को दिया गया जो गंगूबाई जैसी जिंदगी दे रहे है। अभी बात उठ रही है कि एक फिल्म से होनेवाले लाभ का हिस्सा उन लोगो तक जाना चाहिए जिन लोगो की समस्या उठाई गई है। उदाहरण दिए गए है जिनके लाभ का हिस्सा न मिलने का जिक्र है। हम सभी जानते है कि फिल्म जगत एक उद्योग है जिसका काम व्यावसायिक लाभ कमाना अंतिम उद्देश्य है।जाहिर है कि दुनियां का कोई भी व्यवसाई नुकसान नही उठाना चाहता है, हो जाये बात अलग है। लाभ जो प्राप्त होता है उसमें सरकार आयकर प्राप्त कर लेती है( आयकर भी सही नही दिया जाता है, गए अलग विषय है) यहां से लाभकर्ता की मानसिकता बन जाती है कि उसके द्वारा सरकार को जनकल्याण के कार्य हेतु अपनी जिम्मेदारी पूर्ण कर लिया गया है। अब मूल प्रश्न पर लौटते है। क्या गेंहू चाँवल दाल आदि के व्यापारी को अपने मुनाफे में से कुछ हिस्सा किसानों को दिया जाना चाहिए? क्या बहुमंजिला इमारत बनाने वाले बिल्डर को कुछ मकान मजदूरों के लिए बनाना चाहिए? दरअसल लाभ का बंटवारा केवल और केवल भागीदारों के साथ होता है जिस क्षेत्र से प्राप्त हुआ है उसमें नही। फिल्म वाले भी टेक्स देते है ये सरकार की जिम्मेदारी है वह प्राप्त राशि का कैसे उपयोग करे। सरकार की प्राथमिकता सामान्य रूप से मूलभूत सुविधाएं है जो आवास, भोजन,शिक्षा जैसे क्षेत्रों में है ऐसा ही एक क्षेत्र वंचितों का सुधार भी है। ये जरूर है कि 1990 में कश्मीर से आये लोगो को अपने ही देश मे शरणार्थी होना पड़ा जो दुखद है। उनको वे सुविधाएं भी नही मिली जो उन्हें मिलना चाहिए था। ये जिम्मेदारी सरकारो की है और किसी भी सरकार ने पिछले 32 सालो में उनके दर्द को नही समझ पाए। फिल्में केवल तात्कालिक सोच देती है।समस्या को पहुँचा सकती है, हल भी बता सकती है लेकिन सीख लेता कौन है। सारी फिल्मो में बुराई हारते दिखती है।असत्य पर सत्य की जीत हम देखते ही ही है। हम रावण के हश्र से आज तक सीख न सके। राम - सीता, कृष्ण जैसे विराट व्यक्तित्व से हम पुत्र, भाई भाभी नही बन सके । दिल्ली के बर्बर सामूहिक बलात्कार जैसी घटना के बाद लाख सुधार के बाद भी ऐसी घटनाएं घट रही है तो फिल्मो को केवल तात्कालिक माना जाना चाहिए। इनसे हमे कोई विषय मिल सकता है, विचार के लिए लेकिन विमर्श? इन रातो का कोई सवेरा नही है। लाभ और उम्मीद!

25 Mar 2022 05:36AM,
by: Naveen kumar sahu
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कल हुए पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के वर्षा से बाधित मैच भारत के लिए उम्मीद की धूप लेकर आया। कल तक भारत की टीम की सेमीफाइनल में खेलने की उम्मीद लगभग खत्म हो गयी थी वो पुनः जागृत हो गयी है। बचे मैच में 24 मार्च को वेस्टइंडीज को दक्षिण अफ्रीका से खेलना है।अब तक केवल ऑस्ट्रेलिया से पराजित टीम को भारत और पाकिस्तान से पराजित होने वाली वेस्टइंडीज को हराने में कोई कठनाई नही होना चाहिए लेकिन क्रिकेट अनिश्चितता का खेल है इसलिये जब तक मैच खत्म नही होता अनुमान ही लगाया जा सकता है। अगर वेस्टइंडीज , दक्षिण अफ्रीका को हरा देती है तो फिर भारत को भी सेमीफाइनल में पहुँचने के लिए दक्षिण अफ्रीका को अपने अंतिम मैच में हराना ही होगा। इंग्लैंड को दो मैच पाकिस्तान और बांग्लादेश देश से खेलना है। इंग्लैंड मजबूत टीम है और टीम के खिलाड़ियों के आधार पर वे दोनों मैच जीतने की क्षमता रखते है अगर इंग्लैंड दोनो मैच जीत लेती है तो उसके 8 अंक हो जाएंगे। ऐसे में इंग्लैंड तीसरे स्थान पर पहुँच कर सेमीफाइनल में जगह बना लेगा। भारत, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में से कोई दो टीम अपने अन्तिम मैच में कैसा प्रदर्शन करते है ये 27 मार्च को तय हो जाएगा। बहरहाल भारत रन औसत में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज से बेहतर है। इसका मामला फंसा तो भारत सेमीफाइनल का बड़ा दावेदार है।

22 Mar 2022 11:11AM,
by: Naveen kumar sahu
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इन दिनों कश्मीर फ़ाइल की चर्चा है। इस सिनेमा में 32 साल पहले की पृष्ठभूमि को कथानक बनाया गया है। साहित्य और उसके बाद सिनेमा को समाज का दर्पण माना जाता है। समाज मे घटित होने वाले घटनाओ के आधार पर ही साहित्य सृजित होता है लेकिन सिनेमा में दो प्रकार की विभाजन रेखा है। ये उद्योग है जिसमे व्यावसायिक लाभ का मुद्दा पहले रहता है। जोखिम मोल न लेने की आदत इस उद्योग को शुरू से है। इस कारण मसाला फिल्मे 100 में 90 बनती है। इसका कारण भी है कि आम जिंदगी में आदमी इतने झंझटो में घिरा रहता है कि उसे उन्ही झंझटों को पर्दे पर देखना नही सुहाता। यही कारण है कि फिल्म उद्योग मसाला फिल्मे बनाने में ध्यान देता है। 1932 से देश मे सवाक फिल्मो का दौर शुरू हुआ उसके पहले अवाक फिल्में बना करती थी। धार्मिक विषय ही प्रमुख हुआ करते थे , समय के साथ सामाजिक विषय प्रमुख हुए पर ये नाटकीय ज्यादा हुआ करते थे। happy ending के आधार पर फिल्मे पसंदगी थे सो 10 में से 9 फिल्मो का मुद्दा यही रहा।ढेर सारे गाने के साथ फिल्मे बढ़ती और लोग मजे लेते रहे। बीच बीच मे तीसरी कसम, डॉ कोटनिस, जिस देश मे गंगा बहती है, गंगा जमुना, मुझे जीनो दो, जैसी फिल्में बनती रही। लेकिन संख्यात्मक रूप जे ऊंट के मुंह मे जीरा ही रही। नब्बे के दशक में जब व्यावसायिक फिल्मे लॉस्ट एन्ड फाउंड विषयो के साथ मल्टी स्टार फिल्मे बनाने में व्यस्त था जिसमे नाटकीयता की भरमार थी तब चक्र,मंडी,गर्म हवा,आक्रोश,36 चौरंगी लेन, फिल्मो का दौर चला। ये फिल्मे सार्थक फिल्मे कहलाई क्योकि इनमे "सच" था। सच कडुआ होता है इस कारण इन फिल्मों को देखने वाला एक वर्ग भी जन्म लिया जिन्हें बुद्धजीवी माना गया। ये दौर भी ज्यादा नही चला और फिर से गोविंदा जैसे कलाकारों की फिल्में दौड़ने लगी। अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों को रोजी रोटी के लिए समुंदर में नहा कर नमकीन हो गयी हो गाने पर नाचना पड़ा। यद्यपि अमिताभ ने अपने उतरार्द्ध में पीकू,पिंक, सरकार राज अग्निपथ, जैसे सार्थक फिल्मे की लेकिन 200 फिल्म में मात्र 5 %!। नसीरुद्दीन जैसे कलाकारों ने भी ये मान लिया था कि सार्थक फिल्मे रोजी दे सकती है लेकिन रोटी के लिए नाटकीय फिल्मो के पनाह में जाना होगा। 2000 के बाद साल से देश मे त्वरित विषयो को लेकर फिल्म बनाने की साधारण कोशिश जारी रही। ।मद्रास कैफे, ब्लेक,स्पेशल26, रेड,पेडमेंन, जॉली एल एल बी, दृश्यम, पिंक , हिंदी मीडियम, फिल्मे सार्थक रही। अब कश्मीर फाइल आयी है। बहुत समय पहले धारावाहिक "तमस" ने भी ऐसी ही सफलता हासिल की थी। सार्थक फिल्मे समाज का ही हिस्सा है। नजरिया अलग अलग होता है। जब दुनियां में मॉडर्न आर्ट जन्म ले रहा था तब कला प्रेमियों को समझ मे नही आता था तब मॉडर्न आर्ट के प्रवर्तकों ने बताया था कि आप अपनी नही हमारी नज़रो से देखो। कश्मीर फ़ाइल भी नजरिया से ही देखी जाए। सच का सिनेमा या सिनेमा का सच

22 Mar 2022 03:14AM,
by: Naveen kumar sahu