धनपत राय अपने बचपन मे कम से कम ये तो नही जानते रहे होंगे कि उनको, उनके इस दुनियां से रुखसत होने के बाद मुंशी प्रेमचंद के नाम से जाना जाएगा। अंग्रेजो के द्वारा उनके घर पर पड़े छापे के बाद उन्हें सलाह मिली थी कि लेखन की दुनियां में बने रहने के लिए धनपत से प्रेमचंद बनना पड़ेगा। उन्होंने इस सलाह को माना और प्रेमचंद बन गए ताजिंदगी और जिंदगी के बाद भी। एक तो "मुंशी", फिर "प्रेम" ऊपर से 'चंद'
31 Jul 2022 06:41AM,by: Babuaa Desk
सालो पहले एक फिल्म आयी थी - बॉबी, इस फिल्म में एक चोपड़ा थे-प्रेम चोपड़ा। बॉबी फिल्म के साथ प्रेम चोपड़ा, चोपड़ा ब्रांड बन गए, उनको बाज़ीगर फिल्म के मदन चोपड़ा भी पछाड़ नही पाए लेकिन टोक्यो ओलंपिक खेलों मे देश के नीरज चोपड़ा ने स्वर्णिम दूरी तक भाला फेका तब प्रेम चोपड़ा लाइव हुए और ये स्वीकारोक्ति दी कि 1973 से लेकर 38 साल तक के अवधि में चोपड़ा के ब्रांड - प्रेम चोपड़ा को नीरज चोपड़ा ने टेक ओवर कर लिया है। आज नीरज चोपड़ा ने एक और उपलब्धि देश के लिए हासिल की।उन्होंने विश्व एथलेटिक्स स्पर्धा में सिल्वर मेडल हासिल कर 19 साल बाद ओलम्पिक खेलो के बराबरी के विश्वस्तरीय स्पर्धा में देश का परचम लहराया है। नीरज से पहले ये उपलब्धि अंजू बी जॉर्ज़ के पास ही थी।2003 में हुए विश्व एथलेटिक्स स्पर्धा में अंजू बी जॉर्ज ने लंबी कूद( long jump) स्पर्धा में ब्रॉन्ज़ मैडल जीता था। नीरज चोपड़ा नाम है मेरा
24 Jul 2022 12:29PM,by: Babuaa Desk
आदि शब्द का अर्थ पुरातन से है यानी चिरकाल कह लीजिये या दिर्घकाल कह लीजिये कहने का मतलब हज़ारो साल भी है, ऐसे अवधि से प्राकृतिक अंचल जिसमे नदी, पहाड़, जंगल, शामिल है उन स्थानों के आसपास वास करने वाले आदिवासी कहलाये। आदिवासी सदियों तक शहरी सभ्यता से दूर रहे या रखे गए ये बात बहस की नही है लेकिन अपनी छोटी मोटी आवश्यकताओं के लिए प्रकृति के भरोसे रहने वालों की संतुष्टि की अपनी जुदा दुनियां है। वे मूल कन्द और जंगल मे उगने वाले वनस्पति से अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति में वे भरोसेमंद रहे। उन्हें बाहरी दुनियां से ज्यादा सरोकार नही रहा इसी कारण वे आदिवासी है। बाहरी दुनियां के लिए वे कौतूहल के विषय है क्योंकि उनकी न समझ आने वाली दुनियां लोगो को आकर्षित करती है। उनका समाज,संस्कृति, खान पान, वेशभूषा भाषा सभी शहरी सभ्यता से परे है।यहां तक की उनके भगवान भी। मुर्मू होने का मर्म
22 Jul 2022 11:58AM,by: Babuaa Desk
रायपुरा के एक घर मे आज जश्न का माहौल है। ये घर रुचिर दुबे और शिल्पी दुबे का है। इनकी जुड़वा बेटी पीहू और पाखी दुबे ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड दिल्ली के द्वारा आयोजित 12 वी की परीक्षा में98.6 और 96.8 अंक प्राप्त किये है।दोनो कामर्स संकाय की छात्रा है। दोनो अपने पिता रुचिर दुबे के समान चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहती है। दोनो बेटियां पढ़ाई के अलावा पेंटिंग्स में गहरी रुचि रखती है। दोनो ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पेंटिंग्स स्पर्धा में प्रथम स्थान अर्जित किया है। जुड़वा बेटियों ने किया कमाल
22 Jul 2022 11:58AM,by: Babuaa Desk
पहले गजल फिर फिल्मों में गीत गाने का काम लगभग हर गजल गायक ने किया है। भारत मे एक दौर ये भी आया था जब गजल गायक फिल्मी गाना गाने वालो से ऊपर निकल गए थे। इसका अच्छा परिणाम ये भी मिला कि गजल गायकों को फिल्मी गाना भी गाने का अवसर मिलने लगा। अपरंपरागत आवाज़ याने भूपेंदर
20 Jul 2022 06:37AM,by: Babuaa Desk
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