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मेरे ख्याल से व्यक्ति को शिक्षक के रूप में प्रकृति ही पहले शिक्षक के रूप में मिली होगी। सूरज, चंद्रमा, तारे, रात दिन, जंगल, जमीन,पहाड़, नदी, अग्नि, हवा, आसमान ,मौसम, सब इंसान के प्रारंभिक गुरु रहे होंगे।इन्ही से व्यक्ति ने परिस्थिति को समझने की शिक्षा ली होगी। कहा जाता है कि अग्नि का अविष्कार दो वस्तुओं के घर्षण से हुआ। ये प्रकृति ने ही सिखाया, कभी पेड़ का गोल हिस्सा गिर कर लुढ़का होगा तो गोलाकार वस्तु के घूमने की शिक्षा मिली होगी। तेज़ आंधी तूफान बरसात ने पहाड़ो की किसी गुफा में शरण लेने की शिक्षा दी होगी। ठंड के मौसम ने चमड़े को लपेटने की शिक्षा दी होगी। शिक्षा,शिक्षण औऱ शिक्षक

05 Sep 2022 05:37AM,
by: Babuaa Desk
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खेल जगत में अनेक खेल का लोगो से परिचय खिलाड़ियों के माध्यम से होता है। अगर शानदार जानदार खिलाड़ी न रहे तो खेल को अपना अस्तित्व बचाने का खतरा खड़ा हो जाता है। यही नही अगर किसी देश के खिलाड़ी बेहतर न खेले तो उस देश का खेल और खेल का उस देश से नाता टूटने लगता है। वेस्टइंडीज उदाहरण है।आज कौन खिलाड़ी वेस्टइंडीज से खेल रहा है ये कठिन विषय हो गया है। वही कुछ खिलाड़ी ऐसे होते है जिसके कारण खेल और उनका देश भी लोगो के जुबां पर चढ़ जाता है। अमेरिका की सेरेना विलियम्स भी टेनिस जगत में ऐसी ही महिला खिलाड़ी रही जिन्होंने अपने खेल से सारी दुनियां को अचंभित करके रखा था। अपने मन मे एक इक्छा लिए आज उन्होंने टेनिस को अलविदा कह दिया। उनके मन मे महिला टेनिस का सर्वाधिक 25 ग्रेंड स्लैम खिताब जीतने का था। वर्तमान में 24 ग्रेंड स्लैम खिताब जीतने का रिकार्ड मार्गरेट कोर्ट के पास है। सेरेना विलियम्स 23 ग्रेंड स्लैम खिताब जीत चुकी थी लेकिन उनकी बढ़ती उम्र के साथ साथ टेनिस जगत में आती नई संभावनाओं ने सेरेना को 2017 के बाद एक भी खिताब आस्ट्रेलिया, फ्रेंच,विम्बलडन और अमेरिकी ओपन में जीतने नही दिया। 35 साल की उम्र में सेरेना ने अंतिम ग्रेंड स्लैम खिताब ऑस्ट्रेलिया में अपनी सगी बहन वीनस को हराकर जीता था। सेरेना विलियम्स 2018 के विम्बलडन और अमेरिकी ओपन के फाइनल में पहुँची थी लेकिन ओसाका और कारबेर ने उन्हें जीतने नही दिया। 2019 में भी सेरेना विलियम्स विम्बलडन और अमेरिकी ओपन में सिमोना हेलेप और बियांका ने हरा कर उनके खिताब की संख्या को बढ़ने नही दिया। अंततः आज सेरेना 23 ग्रेंड स्लैम खिताब के साथ विदा हो गयी। संयोग ये भी रहा कि जिस अमेरिकन कोर्ट से सेरेना ने अपना ग्रेंड स्लैम खिताब 1999 में जीत कर शुरू किया था उसी कोर्ट में वे आज अंतिम मैच खेला। सेरेना विलियम्स;थमा काला जादू का सफर

03 Sep 2022 12:09PM,
by: Babuaa Desk
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इस देश मे 1928 से हॉकी और 1932 से क्रिकेट खेला जा रहा है। आज़ादी के पहले ही भारत ओलम्पिक खेलो में हॉकी में 3 स्वर्ण पदक जीत चुका था। ये सारे पदक ध्यानचंद के अथक प्रयास का परिणाम था। सारी दुनियां ने हमे खेल के नाम पर इस खिलाड़ी के कारण जाना। ध्यानचंद के कारण ही हॉकी राष्ट्रीय खेल बनी। महज़ 4 साल बाद देश मे आये क्रिकेट में हमारी उपलब्धि 1971 में देखने को मिली। ये सुनील गावस्कर युग की शुरुवात थी। यहां से हम क्रिकेट में विदेश में जीतने की शुरुआत किये। 1983 में कपिलदेव ने फिजा ही बदल दी। हॉकी में एस्ट्रोटर्फ क्या आया हम जीतना ही भूल गए। 1980 में मास्को ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीते लेकिन सारे तगड़े प्रतिद्वंद्वी इसमे शामिल नही थे। क्रिकेट ने अघोषित रूप से राष्ट्रीय खेल का दर्जा पा गया और इस खेल के एक खिलाड़ी, सचिन तेंदुलकर के 200 टेस्ट पूरे होने पर भारत रत्न भी मिल गया जबकि खेल में भारत रत्न बनने का पहला अधिकार ध्यानचंद का था। मेरे ख्याल से ध्यानचंद किसी सत्तारूढ़ दल से प्रभावित नहीं थे, खेल जानते थे, राजनीति नही।खिलाड़ी थे, कूटनीतिज्ञ नही। जब वे दावेदार थे तब भारत रत्न खिलाड़ियों को देने का प्रावधान न था तो मिलता कहां से? सचिन तेंदुलकर के लिए प्रावधान बना दिया गया। अब जब व्यवस्था हो ही गयी थी तो हमारे देश मरणोपरांत सम्मान देने का प्रावधान तो है लेकिन ध्यानचंद पर ध्यान देने वाला कौन है? उनके नाम से खेल रत्न पुरस्कार घोषित कर दिया गया जो पूर्व में राजीव गांधी के नाम पर था। यहां पर भले ही नियत कुछ भी हो लेकिन ध्यानचंद का नाम प्रथम नहीं था बल्कि वे किसी के विकल्प बने, दुखद। जिस खिलाड़ी को हिटलर जैसा तानाशाह अपनी सेना में प्रमोशन देने को तैयार था, विएना(आस्ट्रिया) जहाँ ध्यानचंद की चार हाथ वाली मूर्ति सम्मान में लगी है उस खिलाड़ी के प्रति देश क्यो कृतज्ञता का भाव नही रख पा रहा है? ध्यानचंद है लेकिन किसी को ध्यान नहीं है

30 Aug 2022 06:15AM,
by: Babuaa Desk