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20 साल तक विकेट के एक एन्ड से बॉलिंग करना आसान नहीं होता है खासकर जब आप तेज़ बॉलर हो तिसपर आप अगर पुरुष नहीं है स्त्री है और क्रिकेट खेल रही है वो भी भारत से तो मायने रखती है। भारत मे महिलाओं के लिए समय बीत जाने के बाद भी पुरुषों के बराबर खड़े होने का अवसर नही मिलता है। इसका उदाहरण क्रिकेट खेल को ही ले लीजिए देश के पुरुष खिलाड़ी जो A केटेगरी है उनका सालाना पारिश्रमिक7 करोड़ रुपये है जबकि महिलाओं की A केटेगरी के लिए50 लाख रुपये है। कहने का मतलब बुमराह और झूलन गोस्वामी को केवल पुरुष और महिला होने के कारण एक ही खेल खेलने के लिये बराबरी की बात छोड़िए13 गुना कम राशि दी जा रही है। शाबास झूलन दी

24 Sep 2022 06:43AM,
by: Babuaa Desk
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हर मन प्रीत शब्द को जोड़े तो एक नाम जेहन में आता है- हरमनप्रीत। सिक्ख धर्म मे किसी नाम के साथ सिंह लगा हो तो लड़के का नाम हो जाता है और कौर लगा हो लड़की का नाम हो जाता है। भारतीय खेल जगत में दो हरमनप्रीत है एक भारतीय पुरूष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह है तो भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर है। आज जिस हरमनप्रीत की बात हो रही है वह आधी आबादी के साथ साथ इंग्लैंड में देश की टीम को 3 एकदिवसीय क्रिकेट मैच की सीरीज़ में 23 साल बाद जीत दिलाने वाली कप्तान हरमनप्रीत कौर है। आमतौर पर महिला क्रिकेट को भारत मे देखने वालों की संख्या पुरुषों के क्रिकेट देखने वालों की तुलना में कम है लेकिन आप ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अफ्रीका, इंग्लैंड जाए तो पाएंगे वहां बराबरी से पुरुष औऱ महिलाओं की क्रिकेट को दर्शक मिलते है। ऐसे ही एक देश इंग्लैंड में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान ने एक बार फिर अपने बलबूते पर शानदार जीत दिलाते हुए 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। हर मन प्रीत

22 Sep 2022 05:47AM,
by: Babuaa Desk
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उम्मीद के 41 दिन के जद्दोजहद के बाद राजू श्रीवास्तव ने अंततः आज उम्मीद को भी रुलाते हुए इस दुनियां से चले गए। इस एकाकी होते दुनियां में अब के जमाने मे सबसे बड़ा काम लोगो को हँसाना है। रुलाने का ठेका लेने वाले तो मुफ्त में मिलेंगे लेकिन हँसाने वालो की कमी है। मनोरंजन की दुनियां में हास्य को जन्म देने की कला ईश्वर बहुत कम लोगो के भाग्य में रखता है। राजू भी उनमें से एक था। राजू ने दो तीन दशक तक देश के लोगो का भरपूर मनोरंजन किया ।उनके इस कार्य की हमेशा सराहना होगी। रील लाइफ का एक फायदा है कि कुछ बाते हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाती है। भले ही राजू शरीर से ,आवाज़ से, भाव भंगिमा से,हमारे बीच नही है लेकिन उनके द्वारा किया गया प्रदर्शन सुरक्षित है। खुशी देने वाले की दुनियां में दुनियां में शायद गम बहुत बढ़ गया रहा होगा इसी कारण एक हास्य व्यंग्य के प्रस्तुतकर्ता की जरूरत महसूस हो रही होगी सो राजू को बुला लिया। हँसाने वाले जहाँ भी होते है वे रोते को भी हँसा देते है। गजोधर को बड़ी जिमनेदारी मिली है खुदा को हंसाने की पर हमारे यहां तो कमी हो गयी। जाओ राजू ।अलविदा कौन कहता है कि हँसाने वालो में रुलाने की बखत नही होती है?

21 Sep 2022 06:39AM,
by: Babuaa Desk
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कल हिंदी दिवस था, थोक में हिंदी को अपनाने, बढ़ाने,की बात हो रही थी। आक्रोश भी दिखा कि आजादी के अमृत उत्सव के ७५ साल बीत जाने के बाद भी १४ सितम्बर १९४९ को संविधान में घोषित राज की भाषा आज भी राज भाषा नही बन पाई है। एक देश जिसके बहुतेरे राज्यो में हिंदी बोली लिखी पढ़ी जाती हैं और बहुतेरे राज्यो में बोली नही जाती है, पढ़ी नही जाती है वहां भाषाई बैर भी है बावजूद इसके हिंदी की पैठ बढ़ी है। १९९० के पहले के काल को याद करे तो देश मे रोजगार नही के बराबर था। केवल सरकारी नौकरी हुआ करती थी न तो तकनीकी महाविद्यालय की संख्या थी और न ही भर्ती। मैं तब के प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और वित्तमंत्री मनमोहन सिंह का आभार मानता हूँ जिन्होंने देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आगमन के द्वार खोले। यही से निजी संस्थानों के आगमन की शुरूवात हुई और कमोबेश आंग्ल भाषा मे शिक्षा का भी आगमन महानगरों से निकल कर गांव गांव में हुआ।  बीते ३२ साल और नई हिंदी

15 Sep 2022 09:44AM,
by: Babuaa Desk
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पिछले साल अगस्त के आखिर दिनों में यू ही विचार आया कि जोतेश्वर आश्रम (गाडरवारा) जिला नरसिंहपुर चला जाये। आनन फानन सड़क मार्ग से कुछ ही घण्टो में यात्रा को गति मिल गयी। रायपुर से सिमगा बेमेतरा कवर्धा होते हुए जब यात्रा आगे बढ़ी तो कान्हा नेशनल पार्क के पहले मुक्की गेट के पास तेज़ी से बारिश होने लगी। रात तक हम लोग भेड़ाघाट के एमपी टूरिज्म के होटल में रुके । यात्रा का यह पहला पड़ाव था। दूसरे दिन हम लोग गाडरवारा के लिए रवाना हो गए।नरसिंहपुर से बीस किलोमीटर पहले घने सुरम्य जंगल के बीच जोतेश्वर आश्रम में प्रवेश किये तो आसमान में बदली की परत चढ़ी हुई थी। त्रिपुर सुंदरी के भव्य मंदिर में दर्शन करने के बाद यही के भोजनालय में स्वादिष्ट भोजन करने के बाद हम लोग स्वामी स्वरूपानंद जी के आश्रम की तरफ पैदल बढ़ने लगे। रास्ते मे उनके सालो के तपस्या के लिए उपयोग की गई शिला और रहने की गुफा के अलावा वो पेड़ भी देखे जिसमे वे रात्रि को कमर में कपड़ा बांध कर नींद भी सो लेते थे, देखने का सौभाग्य मिला।  स्वामी स्वरूपानंद जी और आध्यात्मिक यात्रा

12 Sep 2022 07:13AM,
by: Babuaa Desk