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देश मे एक दौर ऐसा भी आया कि विदेश मैं बैठे फिरकापरस्त लोगो के चलते देश की रक्षा में 5 क( केश,कंघा,कड़ा,कृपाण,कच्छा) स्वीकारने वालो में से स्वर्ण मंदिर को आतंकवादियों का अड्डा बना दिया तहस। देश मे ये संदेश दिया जाना जरूरी था कि सुबह के भूले है शाम को आ जाएंगे। ऐसे मे राष्ट्रपति बनने वाले दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में (पहले नीलम संजीव रेड्डी) ज्ञानी जैल सिंह राष्ट्रपति बनाये गए। ज्ञानी जी पंजाब के मुख्यमंत्री रहने के बाद केंद्र की राजनीति में आकर गृह मंत्री बने थे। नाम के ज्ञानी स्कूल कालेज कभी नही गए बल्कि धार्मिक शिक्षा के कारण ज्ञानी कहलाये थे। उनका मूल नाम जरनैल सिंह था लेकिन आज़ादी की लड़ाई में जैल गए तो वापस आकर जरनैल सिंह से जैल सिंह बन गए। राष्ट्रपति के प्रधानमंत्री के साथ मनमुटाव की पहली सार्वजनिक खबर जैल सिंह के कार्यकाल में हुआ। वे पहले राष्ट्रपति बने जिन्होंने राष्ट्रपति के जेबी वीटो पावर का उपयोग किया था और डाक तार विधेयक बिल को रोक दिया था। व्यवहारिक पढ़ाई कही ज्यादा तार्किक होती है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के द्वारा अपने कोट में गुलाब लगाते थे।ज्ञानी जैल सिंह पहले राष्ट्रपति रहे जो पंडित जवाहरलाल नेहरू के समान ही गुलाब लगाते रहे। जरनैल सिंह से बने जैल सिंह

02 Jul 2022 12:42PM,
by: Babuaa Desk
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असम में जन्मे औऱ असम से ही विधायक और सांसद बनने वाले फकरुद्दीन अली अहमद पांचवे राष्ट्रपति थे। जाकिर हुसैन के बाद वे दूसरे राष्ट्रपति बने जो अल्पसंख्यक थे। एक संयोग ये भी रहा कि फकरुद्दीन अली अहमद और जाकिर हुसैन दोनो ही अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। दोनो तीन साल तक ही राष्ट्रपति रहे। भारतीय राजनीति के सबसे कठिन दिनों (आपातकाल) के वे राष्ट्रपति थे। उन्हें आपातकालीन राष्ट्रपति के नाम से भी जाना जाता है। वे इंग्लैंड में पंडित जवाहर लाल नेहरू के मित्र रहे और उनके कहने पर राजनीति में आये थे।उनको मुश्लिम लीग ने अपने तरफ मिला लिया था लेकिन वे आज़ादी की लड़ाई में भारत छोड़ो में सामने आए। जवाहरलाल नेहरू के मृत्यु के बाद राष्ट्र्पति की परिभाषा बदलने लगी थी। फकरुद्दीन अली अहमद कड़ी बने। आपातकालीन राष्ट्रपति फकरुद्दीन अली अहमद

28 Jun 2022 11:38AM,
by: Babuaa Desk
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भारत के तीसरे राष्ट्रपति जाकिर हुसैन शिक्षा के क्षेत्र से आने वाले दूसरे राष्ट्रपति थे।उनके पहले डॉ राधाकृष्णन भी शिक्षा के क्षेत्र से ताल्लुक रखते थे। जहां राधाकृष्णन सीधे अध्यापन कार्य से जुड़े थे तो जाकिर हुसैन प्रशासनिक दखल रखने वाले थे। उन्होंने मुश्लिम सम्प्रदाय को शिक्षित करने के पक्षधर थे। इसके लिए मुश्लिम नेशनल यूनिवर्सिटी की स्थापना की 1926 से लेकर 1948 तक वे इससे जुड़े रहे। ये यूनिवर्सिटी आगे चल कर जामिया नगर दिल्ली में स्थापित होने पर जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी कहलाता है। इस यूनिवर्सिटी के जाकिर हुसैन 20 साल तक उपकुलपति रहे। वे राज्यसभा में चुने गए, बिहार के राज्यपाल बने, देश मे दूसरे उपराष्ट्रपति बने ,वे डॉ राधाकृष्णन के समान ही राष्ट्रपति बनने से पहले ही 1963 में भारत रत्न बन चुके थे। उन्हें शिक्षा और समाज की उन्नति के लिए असाधारण कार्य के लिए भारत रत्न उपाधि दी गयी। 1967 में देश के राष्ट्रपति बने और ऑफिस में ही उनका निधन हो गया था। वे लगभग 3 साल तक ही राष्ट्रपति रह पाए थे। अनुशासन के लिए खुद ब्रश पॉलिश ले बैठ गए जाकिर हुसैन

24 Jun 2022 02:45PM,
by: Babuaa Desk
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भारत के दूसरे राष्ट्रपति , देश के पहले उपराष्ट्रपति बनने से पहले दर्शन शास्त्र के प्रध्यापक थे। भारतीय संस्कृति और आध्यात्म का गम्भीर अध्ययन करने के बाद वे प्राध्यापक के रूप में छात्रों के बीच वे बहुत लोकप्रिय थे। उनका मानना था कि शिक्षक उन्ही लोगो को बनना चाहिए जो छात्रों से आदर और स्नेह अर्जित कर सके। वे शिक्षक बनने के लिए ब बुद्धिमान होने केज़ात योग्यता को भी अनिवार्य मानते थे। जो शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित न हो, शिक्षा को मिशन न माने वह अच्छा शिक्षक नही हो सकता है। उनके शिक्षक होने की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब वे मैसूर यूनिवर्सिटी से कलकत्ता यूनिवर्सिटी पढ़ाने के लिए जा रहे थे तो मैसूर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बग्घी को फूलों से सजा कर राधाकृष्णन को रेल्वे स्टेशन तक छोडने गए। शिक्षक राष्ट्रपति-राधाकृष्णन

23 Jun 2022 07:40AM,
by: Babuaa Desk
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 देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद बहुत ही सरल सहज व्यक्ति थे, उनके रहन सहन को देख कर लगता था मानो खेत से कोई किसान निकल कर राष्ट्रपति भवन पहुँच गया हो। सहजता के अलावा देश के पहले राष्ट्रपति का हिंदी प्रेम अनोखा था। वे हिंदी को सर्वश्रेष्ठ मुक़ाम पर पहुँचाने के लिए अपने भगीरथ प्रयास को निरंतरता दिए हुए थे। वे स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में बराबरी की हिस्सेदारी रखे हुए थे लेकिन हिंदी के प्रति उनकी गम्भीरता भी बराबर की थी। वे भारत मित्र, भारतोदया, कमला पत्रिका में लेख लिखते जो समाज मे चेतना के लिए होते थे। वे1912 में कोलकाता में होने वाले अखिल भारतीय हिंदी सम्मेलन में प्रधानमंत्री थे ।1923 में वे काकीनाड़ा अधिवेशन में अध्यक्ष बने थे लेकिन बीमारी के कारण जा नही सके। उनका भाषण जमनालाल बजाज ने पढ़ा। 

22 Jun 2022 01:05AM,
by: Babuaa Desk
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यूं तो उत्तर और दक्षिण के अभिप्राय परस्पर विपरीत विचारधारा के रूप में लिया जाता है। राजनीति में वाम और दक्षिण पंथ भी बदलाव और परंपरा को परिभाषित करनेवाले विचारधारा है। फ्रांसीसी क्रांति के पहले वहां के संसद में बाई तरफ बैठने वाले गणतंत्र चाहते थे जबकि दाई ओर बैठे लोग परंपरागत रूप से पुरानी व्यवस्था के पक्षधर थे। समय के साथ साथ दक्षिणपंथी विचारधारा में कट्टरता का सम्मिश्रण बना लेकिन भारत देश की राजनीति में प्रथम नागरिक के लिए एक अनकही व्यवस्था ने जन्म लिया। शुरुआती दौर में भारत के संविधान लागू होने के पहले गवर्नर जनरल( जो संविधान लागू होने के बाद राष्ट्रपति पद के रूप में संस्थापित हुआ) भी पंडित जवाहर लाल नेहरू के कार्यकारी प्रधानमंत्री बनने पर सी राजगोपालाचारी के रूप में दक्षिण को समन्वित करने का प्रयास था। यदि संविधान सभा का रुख थोड़ा सा भी नरम होता तो देश का पहला राष्ट्रपति दक्षिण से ही होता लेकिन दूसरे राष्ट्रपति के साथ ही उत्तर का प्रधानमंत्री और दक्षिण के राष्ट्रपति का संतुलन कमोबेश तब तब कायम हुआ जब जब देश मे सामान्य स्थिति रही। सर्वपल्ली राधाकृष्णन(1962) के साथ ही देश को दक्षिण का राष्ट्रपति मिला । 1967 में जाकिर हुसैन राष्ट्रपति बने तो वे भी दक्षिण का प्रतिनिधित्व करते थे। 1977 में पहली बार जनता पार्टी सत्ता में आई तो दक्षिण के ही नीलम संजीव रेड्डी के राष्ट्रपति बने। 1980 इंदिरा गांधी मेडक( आंध्रप्रदेश) से लोकसभा चुनाव जीती तो दक्षिण के प्रधानमंत्री बना । इंदिरा गांधी ने उत्तर से ज्ञानी जैल सिंह को राष्ट्रपति बना कर उत्तर दक्षिण का संतुलन बनाये रखा।1987 में उत्तर के प्रधानमंत्री राजीव गांधी रहे तो आर वेंकटरमन दक्षिण से राष्ट्रपति बने। 1997 में भी दक्षिण से ही के आर नारायण राष्ट्रपति बने। 2002 में अटलबिहारी वाजपेयी, गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री थे उन्होंने भी दक्षिण के राष्ट्रपति के रूप मे तुरूप का पत्ता निकाल कर ए पी जे कलाम को सामने कर दिया। ये भी उत्तर दक्षिण के सामंजस्य का नायाब उदाहरण रहा था। उत्तर- दक्षिण फार्मूला

19 Jun 2022 05:27AM,
by: Babuaa Desk